लिक्विड स्टॉक क्या है? अगर आपने शेयर बाजार में ट्रेडिंग के बारे में कहीं पढ़ा या सुना होगा। तो वहां हमेशा liquid stock को खरीदने व बेचने के लिए कहा जाता है। आज बड़े बड़े ट्रेडर्स लिक्विड स्टॉक में ट्रेड करने को कहते हैं। साथ ही जिस स्टॉक में liquidity नहीं होती है। तो उसमे ट्रेडिंग करने के लिए आपको हमेशा 'ना' ट्रेड करने की सलाह देते हैं।

इस तरह के जोखि‍म का क्‍या मतलब है?

लिक्विडिटी क्या है?

Liquidity meaning in Hindi : Get meaning and translation of Liquidity in Hindi language with grammar,antonyms,synonyms and sentence usages by ShabdKhoj. Know answer of question : what is meaning of Liquidity in Hindi? Liquidity ka matalab hindi me kya hai (Liquidity का हिंदी में मतलब ). Liquidity meaning in Hindi (हिन्दी मे मीनिंग ) is सम्पत्ति.English definition of Liquidity : the state in which a substance exhibits a characteristic readiness to flow with little or no tendency to disperse and relatively high incompressibility

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'फाइनेंशियल लिक्विडिटी' क्‍या है? इसके बारे में यहां जानिए 5 अहम बातें

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हर तरह के एसेट की फाइनेंशियल लिक्विडिटी अलग-अलग होती है. बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट, सूचीबद्ध शेयर और ओपन-एंडेड म्‍यूचुअल फंड जैसे एसेट अपेक्षाकृत ज्‍यादा लिक्विड होते हैं.

2. किसी एसेट को कैश में बदलने में जितना कम वक्‍त लगता है, वह उतना ही ज्‍यादा लिक्विड होता है. बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट, सूचीबद्ध शेयर और ओपन-एंडेड म्‍यूचुअल फंड जैसे एसेट अपेक्षाकृत ज्‍यादा लिक्विड होते हैं.

3. जितनी कम लागत में किसी एसेट को कैश में बदल लिया जाए, वह उतना ज्‍यादा लिक्विड होता है. कुछ एसेट के साथ पेनाल्‍टी और एग्जिट लोड होते हैं, जो लिक्विडिटी क्या है? उसकी कॉस्‍ट बढ़ाते हैं.

क्यों लिक्विडिटी में कमी का सामना लिक्विडिटी क्या है? करना पड़ता है?

कई कारणों से रिटेल निवेशकों के लिए कॉरपोरेट डेट मार्केट में लिक्विडिटी की कमी आती है. खरीदार बाजार से गायब हो जाते हैं. जो बॉन्ड खरीदने के इच्छुक भी होते हैं, वे इनकी कम कीमत देना चाहते हैं.

लॉक-इन अवधि के मामले में क्या हाेता है?

लॉक-इन अवधि के मामले में क्या हाेता है?

कुछ इंस्ट्रूमेंट में न्यूनतम लॉक-इन अवधि हो सकती है. यानी एक तय समय तक इनमें से पैसा नहीं निकाला जा सकता है. बैंक एफडी और म्यूचुअल फंडों की टैक्स सेविंग स्कीमें (ELSS) इन्हीं में से एक हैं.

क्या शेयर बाजार में लिक्विडिटी रिस्क हाेता है?

क्या शेयर बाजार में 'लिक्विडिटी रिस्क' हाेता है?

शेयर बाजार में काफी ज्यादा लिक्विडिटी होती है. हालांकि, कुछ कंपनियों के शेयरों की ट्रेडिंग रफ्तार में नहीं होती है. इनके साथ भी लिक्विडिटी का जोखिम होता है.

(इस पेज की सामग्री सेंटर फॉर इंवेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग (सीआईईएल) के सौजन्य से. गिरिजा गादरे, आरती भार्गव और लब्धि मेहता का योगदान.)

Web Title : what is liquidity risk in investments what you should know
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Trading के लिए Liquid Stocks को कैसे चुने?

Trading के लिए लिक्विड स्टॉक का होना आवश्यक है। खासकर intraday trading के लिए highly liquid stocks का होना जरूरी है। स्टॉक में वॉल्यूम के साथ साथ volatility होने से शेयर कि लिक्विडिटी बढ़ जाती है। आइए तो फिर जानते हैं की ट्रेडिंग के लिए लिक्वड स्टॉक्स कैसे चुने?

1. High Trade Volume

किसी भी स्टॉक में high volume होने का मतलब उस स्टॉक पर एक दिन में कितनी खरीद और बिक्री हुई है। हाई वॉल्यूम यानी कि उस स्टॉक में हाई लिक्विडिटी का होना है।

2. Bid/Ask प्राइस में कम अंतर होना

Bid/Ask प्राइस में कम अंतर होने का मतलब यह हुआ की उस स्टॉक को खरीदने के लिए अनेकों खरीददार मौजूद है। वहीं दूसरी तरफ अनेकों विक्रेता उस स्टॉक को बेचने के लिए मौजूद है। इससे slippage कि कमी और high liquidity होना दर्शाता है।

3. मध्य volatility वाले शेयरों को चुने

अगर किसी स्टॉक में कम लिक्विडिटी यानी कि वोलैटिलिटी बिल्कुल भी नहीं है। वह स्टॉक जो पूरी तरह से choppy है। उनसे हमेशा दूर रहना चाहिए। लेकिन वही दूसरी तरफ अगर स्टॉक ज्यादा वोलेटाइल होगा, तो उसमे नुकसान भी उतना ही ज्यादा हो सकता है। इसलिए ट्रेडिंग के लिए मध्य volatility वाले शेयरों को चुने। मध्य volatility वाले शेयरों में रिस्क, हाई volatility वाले शेयरों से कम होता है।

निष्कर्ष

ट्रेडर्स के नजरिए से स्टॉक में लिक्विडिटी लिक्विडिटी क्या है? होना बहुत जरूरी होता है। हाई लिक्विडिटी वाले स्टॉक को आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है। इस तरह के स्टॉक को जल्दी से नकदी में बदला जा सकता है। अगर किसी स्टॉक में लिक्विडिटी नहीं है तो शायद आप एक अच्छी ऑपर्च्युनिटी खो दे।

डे ट्रेडर्स को हाई लिक्विडिटी वाले स्टॉक का चयन करना चाहिए। क्योंकि उन्हें एक दिन में कई सौदे करने पड़ते हैं। अगर दूसरी तरफ देखे तो स्टॉक में लिक्विडिटी नहीं होने के कारण आप एक दिन में कई ट्रेड ना ले पाए। Illiquid stocks में आपके रिस्क कैपेसिटी से भी ज्यादा का नुकसान हो सकता है।

उम्मीद करता हूं कि आपको आज का लेख "liquid stocks क्या है? लिक्वड स्टॉक कैसे चुने?" पसंद आया होगा। ऐसे ही वित्तीय बाजार के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे ब्लॉग से जुड़े रहे। हम यहां आपको वित्तीय बाजार के साथ साथ टेक्नोलॉजी से जुड़ी अन्य जानकारियां भी साझा करते हैं।

क्या है फाइनेंशियल लिक्विडिटी ? निवेश करने से पहले इसका पता लगाना जरूरी

By: एबीपी न्यूज़ | Updated at : 13 Jan 2021 01:06 PM (IST)

फाइनेंशियल लिक्विडिटी का सीधा सा मतलब यह है कि बाजार की कीमतों के मुताबिक आपका मौजूदा एसेट कितनी जल्दी कैश में बदल सकता है. जब भी आप कोई ऐसे एसेट में निवेश के लिए फाइनेंशियल प्लानर की सलाह लेने जाते हैं, तो आपको एसेट की लिक्विडिटी पर ध्यान देने को कहा जाता है. अलग-अलग एसेट के हिसाब से लिक्विडिटी भी अलग-अलग होती है. दरअसल एसेट को कैश में बदलने की जरूरत आपको तब पड़ती है जब आपको खर्च या निवेश करने के लिए तुरंत कैश की जरूरत हो.

बैंक एफडी, म्यूचुअल फंड, शेयरों की लिक्विडिटी अधिक

दरअसल किसी एसेट को कैश में बदलने में जितना कम वक्त लगता है वह उतना ही लिक्विड होता है. बैंक एफडी, लिस्टेड कंपनियों के शेयर और ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड जैसे एसेट ज्यादा लिक्विड होते हैं. किसी एसेट जितनी कम लागत में कैश में बदला जाए उसकी लिक्विडिटी और अच्छी मानी जाती है. कुछ एसेट ऐसे होते हैं, जिसे बेचने या उसमें से निकलने पर पेनल्टी या एग्जिट फीस लगती है. इस हिसाब से यह कमजोर लिक्विडिटी वाले एसेट माने जाएंगे.

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