चाचा-भतीजा से 19 करोड़ की धोखाधड़ी: धान खरीद के बाद नहीं किया भुगतान; करनाल की राइस मिल के मालिकों पर केस

बरवाला थाना। - Dainik Bhaskar

हरियाणा में हिसार के बरवाला में दो व्यापारियों से धान की खरीद में पैसों की अदायगी न करने पर करनाल की ताराचंद राइस मिल के मालिकों के खिलाफ करीब 19 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है। मामले में मिल के एमडी अनिल सिंगला, हितेश सिंगला और सुनीता आरोपी है।

पुलिस में दी शिकायत में बरवाला मंडी के हनुमान निवासी ने बताया कि वह पिछले कई सालों से बरवाला मंडी में धान की खरीद बेच का काम करता है। वर्ष 2015 से उसकी करनाल के ताराचंद मिल के मालिकों के साथ व्यापारिक जान पहचान है। वह सालों से उन्हें किसानों से जीरी खरीद कर देता है। मिल मालिक पेमेंट समय- समय पर देते रहते थे, हालांकि हर बार थोड़ी बहुत पेमेंट रह जाती।

दोनों की राशि 19 करोड़ रुपए से ज्यादा

शिकायत कर्ता ने बताया कि मिल को हिसाब किताब करने के लिए कहा तो 31 मार्च 2022 तक 17 करोड़ 60 लाख 35 हजार 682 रुपए की पेमेंट उनकी ओर बकाया मिली। जिस पर फर्म संचालकों ने कहा कि जल्द ही यह रकम अदा कर दी जाएगी। उसके भतीजे की फर्म सज्जन कुमार ने भी मिलर्स से 1 करोड़ 91 लाख 92 हजार 531 रुपए की जीरी बेची थी। जिसका भुगतान अभी बाकी है।

पंचायत में कर चुके थे मना

शिकायतकर्ता ने बताया कि मिलर्स के साथ कई बार पंचायत हो चुकी, लेकिन फिर भी पैसों का भुगतान नहीं किया और बार-बार टालते रहे। मिलर्स ने अब उसकी बकाया रकम देने से मना कर दिया और जान से मारने की धमकी दी। आरोपियों ने उनके साथ अमानत में ख्यानत की करते हुए धोखाधड़ी की है। पुलिस ने शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर मिलर्स संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

मिल व्यापार का भुगतान नहीं करता है

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कैश में करने जा रहे हैं भुगतान! इन बातों का रखें खास ध्यान, भरना पड़ सकता है जुर्माना

Cash Payment: आयकर कानून के तहत नकद लेन-देन की जो अधिकतम सीमा तय की गई है, उससे अधिक का भुगतान अगर आप कैश में करते हैं तो आपको परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है.

कर्ज की स्थिति में मात्र 20000 रुपये तक नकद में लेन-देन कर सकते हैं.

सरकार देश में कालेधन पर रोक लगाने और डिजिटल माध्यम से लेन-देन मिल व्यापार का भुगतान नहीं करता है को बढ़ावा देने के लिए नकद लेन-देन या भुगतान की सीमा को कम करने पर जोर देती रही है. हाल में एक तय सीमा से अधिक कैश भुगतान को लेकर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने लोगों के लिए चेताया भी था. आयकर कानून के तहत नकद लेन-देन की जो अधिकतम सीमा तय की गई है, उससे अधिक का भुगतान अगर आप कैश में करते हैं तो आपको परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है.

नकद भुगतान को लेकर मौजूदा कानून
सरकार की तरफ से तय की गई सीमा के मुताबिक, आप 2 लाख रुपये से अधिक राशि का भुगतान कैश या नकद में नहीं कर सकते. आप अपने नजदीकी रिश्तेदार या पति/पत्नी से भी एक दिन में 2 लाख रुपये से अधिक नकद में नहीं ले सकते. इसको आप ऐसे समझ सकते हैं कि अगर कोई सामान आप तीन लाख रुपये में खरीद रहे हैं तो आपको इसके लिए बैंक के माध्यम से ही भुगतान करना होगा. अगर आप 3 लाख रुपये अलग-अलग टुकड़ों में दो-तीन दिन के भीतर देना चाहते हैं तो उसकी भी अनुमति नहीं होगी. सिर्फ शादी-विवाह के मामले में अगर अलग-अलग दुकान से जूलरी खरीदी जाती है तो इस सीमा में राहत दी जा सकती है. अगर दुकानदार नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे आयकर विभाग लेन-देन की रकम के बराबर जुर्माना देना पड़ सकता है.

कर्ज और भुगतान
नकद लेन-देन के रूप में कर्ज लेने पर भी नियम बनाए गए हैं. कर्ज की स्थिति में मात्र 20000 रुपये तक नकद में लेन-देन कर सकते हैं. इससे अधिक के कर्ज के लिए बैंक का माध्यम ही चुनना होगा. इसी तरह कर्ज को वापस करने में भी समान नियम लागू होते हैं.

संपत्ति की खरीद-बिक्री
अचल संपत्ति के मामले में नकद लेन-देन की सीमा काफी कम है. नियमों के मुताबिक, अचल संपत्ति के मामले में कर कानूनों के तहत 20,000 रुपये से अधिक नकद लेन-देन की अनुमति नहीं दी गई है. अगर किसी अचल संपत्ति के लिए पेशगी ली जा रही है तो इसमें भी नकदी वाला नियम ही लागू होगा. जानकारों का कहना है कि कि जायदाद कालेधन का सबसे मिल व्यापार का भुगतान नहीं करता है बड़ा माध्यम है.

व्यापार संबंधी खर्च
अगर आप कारोबार करते हैं तो इस मद में खर्च के लिए प्रत्येक दिन और प्रत्येक लेन-देन के लिए 10,000 रुपये की नकद सीमा रखी गई है. अगर कोई कारोबारी निर्धारित सीमा से अधिक कैश देता है तो वह आईटीआर दाखिल करते समय इसे खर्च के रूप में दिखा टैक्स छूट का दावा नहीं कर सकता.

टैक्स सेविंग स्कीम
अगर आप इनकम टैक्स में बचत का फायदा लेना चाहते हैं तो स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम कभी भी कैश में जमा न करें. बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक, आयकर कानून के मुताबिक अगर बीमा का प्रीमियम नकद में चुकाया है तो धारा 80डी के तहत टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलेगा. विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रीमियम हमेशा बैंक के जरिये ही जमा कराना चाहिए.

कैश पाने वाले पर गिरेगी गाज
अधिकांश मामलों में जो व्यक्ति कैश में भुगतान ले रहा है, उसकी जिम्मेदारी होती है कि वह नकद में भुगतान न ले. ऐसे में अगर किसी तरह का जुर्माना लगता है तो उसे भरने की जिम्मेदारी उसी की होगी. टैक्स सलाहकार का कहना है कि कैश में पैसे न लेने की जिम्मेदारी पैसा पाने वाले की है क्योंकि नकद भुगतान करने वाला व्यक्ति मुकर भी सकता है.

बैंकों का लोन नहीं चुकाने पर क्या होता है, क्या गारंटर को भरना होता है पूरा पैसा, जानिए नियम

शुरुआती कोशिशें जब नाकाम हो जाती हैं, तभी बैंक कानूनी कार्रवाई शुरू करते हैं. अगर लोन लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, कोई हादसा जाए या गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए तो बैंक रीपेमेंट में मोहलत देता है.

बैंकों का लोन नहीं चुकाने पर क्या होता है, क्या गारंटर को भरना होता है पूरा पैसा, जानिए नियम

अगर किसी होम लोन बॉरोअर की मौत हो जाती है तो कर्जदार की मौत के बाद लोन चुकाने की जिम्मेदारी को-एप्लीकेंट या फिर गारंटर की होती है. अगर ये दोनों भी नहीं हैं तो बैंक उस शख्स के पास पहुंचेगा जो कर्जदार की संपत्ति का कानूनी उत्तराधिकारी होगा. इन तमाम रास्तों के जरिए अगर बैंक को यह लगता है कि उसके कर्ज की भरपाई संभव नहीं है तो वह उस प्रॉपर्टी की नीलामी करेगा और अपने बकाए का भुगतान करेगा. बदलते दौर में तो हर तरह के लोन का इंश्योरेंस होता है. बैंक इस इश्योरेंस के लिए प्रीमियम का भुगतान कस्टमर से ही करवाता है. ऐसे में अगर किसी बॉरोअर की मौत हो जाती है तो बैंक इंश्योरेंस कंपनी से पैसा लेता है.

लोन लेने जा रहे हैं तो आपके दिमाग में यह सवाल उठ रहा होगा. लोन लेने वाले सभी लोग उधार का पैसा नहीं चुका पाते. कुछ लोगों की मजबूरी होती है तो कुछ लोग जानबूझ कर डिफॉल्ट करते हैं. डिफॉल्ट करने वाले लोगों को लगता है कि कार्रवाई होगी भी तो वे उसे देख लेंगे. अमूमन लोग बैंकों या गैर-वित्तीय संस्थाओं के पैसे चुका देते हैं क्योंकि उन्हें कार्रवाई का डर होता है. लोन लेना मजबूरी है तो कही-कहीं जरूरी भी. होम लोन लेकर घर बनाते हैं और वही ऑटो लोन लेकर हम गाड़ी खरीदते हैं. दोनों की जरूरतें अलग-अलग हैं. फिर उस लोन पर ब्याज भरते हैं. जो लोग ब्याज और मूलधन का पैसा मिल व्यापार का भुगतान नहीं करता है नहीं चुकाते, वे डिफॉल्ट घोषित हो जाते हैं.

क्या लोन नहीं चुकाने या डिफॉल्टर घोषित होने पर बहुत बड़ी आफत आ जाती है? यह पूरी तरह से लोन लेने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है. जो लोग लोन डिफॉल्टर के रूल और अपने अधिकार जानते हैं, वे बैंकों या गैर-वित्तीय संस्थानों के सामने मजबूती से अपनी बात रखते हैं. वे बताते हैं कि अभी पैसा मिल व्यापार का भुगतान नहीं करता है क्यों नहीं लौटा पा रहे और भविष्य में उधार का पैसा लौटा देने की वे मंशा रखते हैं. डिफॉल्ट होने पर दो तरह की मुश्किल होती है. पहला, क्रेडिट स्कोर निगेटिव में चला जाएगा. लोन लेने और उसे नहीं चुकाने पर आपके क्रेडिट से जुड़ी सभी जानकारी सिबिल को भेज दी जाती है. ये सूचनाएं और भी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी को दी जाती हैं. इससे आगे लोन लेने में दिक्कत आएगी. अगर आपने लोन लेने के लिए कोई प्रॉपर्टी बंधक रखी है तो बैंक उसे कैप्चर कर सकता है. बाद में उसकी नीलामी भी कराई जा सकती है.

क्या मिलती है मोहलत

ऐसा नहीं है कि लोन नहीं चुकाने पर मिल व्यापार का भुगतान नहीं करता है हाथों हाथ कार्रवाई शुरू हो जाती है. बैंकों की तरफ से इसकी कुछ मोहलत मिलती है. सबसे पहले तो उधार लेने वाले व्यक्ति को एक नोटिस भेजा जाता है जिसमें लोन और ब्याज की राशि का जिक्र होता है. अगर बैंक को लगता है कि उधारकर्ता जानबूझ कर कर्ज नहीं चुका रहा, पैसे रहते हुए समय पर ईएमआई नहीं चुकाई गई या रीपेमेंट नहीं किया गया, तो बैंक कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकता है. लोन लेने वाले व्यक्ति के साथ कोई गारंटर है तो बैंक पहले उससे संपर्क करता है. इसके लिए गारंटर एग्रीमेंट होता है. इसमें लिखा जाता है कि लोन लेने वाला आदमी उधार चुकाने में डिफॉल्ट करता है तो गारंटर को पैसा भरना होगा.

बैंक अपनी कार्रवाई पहला रीपेमेंट नहीं चुकाने पर ही शुरू कर देते हैं. लेकिन यह कार्रवाई कितनी गंभीर हो सकती है, वह बैंक और कस्टमर के बीच पनपे विवाद या रिश्ते पर निर्भर करता है. शुरुआती कोशिशें जब नाकाम हो जाती हैं, तभी बैंक कानूनी कार्रवाई शुरू करते हैं. अगर लोन लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, कोई हादसा जाए या गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए तो बैंक रीपेमेंट में मोहलत देता है. यह मोहलत उधार लेने वाले व्यक्ति (यदि दुर्घटना हो जाए या गंभीर तबीयत खराब) और उसके परिवार को मिलती है. रिजर्व बैंक का साफ कहना है कि उधारकर्ताओं को मोहलत देनी है और बैंक कभी बाहुबल का इस्तेमाल नहीं कर सकते.

मूलधन से ज्यादा ब्याज हो जाए तो

कभी स्थिति ये भी आती है कि आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर उधार लेने वाला व्यक्ति समय पर ब्याज नहीं चुका पाता. इससे मिल व्यापार का भुगतान नहीं करता है मूलधन से ज्यादा ब्याज की राशि हो जाती है. ऐसे में उधारकर्ता लोन चुकाने में असमर्थ हो जाता है. इसमें मोहलत देते हुए बैंक वन टाइम सेटलमेंट का ऑफर देते हैं. इस दशा में बैंक इस लोन को नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA में डाल देते हैं. इसमें उधार लेने वाला आदमी दिवालिया घोषित हो जाता है जो लोन चुकाने में अक्षम मान लिया जाता है.

इससे बचने के लिए बैंक उस आदमी को एक बार में थोड़ी राशि चुका कर लोन से बाहर निकलने का मौका देती है. इसमें देखा जाता है कि बैंक मूलधन और ब्याज की अधिकांश राशि माफ कर देते हैं और एक लमसम राशि देने का प्रस्ताव दिया जाता है. इसका फायदा लिया जा सकता है लेकिन क्रेडिट स्कोर बट्टा खाते में चला जाएगा और आगे किसी तरह का लोन लेना मुश्किल होगा.

चाचा-भतीजा से 19 करोड़ की धोखाधड़ी: धान खरीद के बाद नहीं किया भुगतान; करनाल की राइस मिल के मालिकों पर केस

बरवाला थाना। - Dainik Bhaskar

हरियाणा में हिसार के बरवाला में दो व्यापारियों से धान की खरीद में पैसों की अदायगी न करने पर करनाल की ताराचंद राइस मिल के मालिकों के खिलाफ करीब 19 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है। मामले में मिल के एमडी अनिल सिंगला, हितेश सिंगला और सुनीता आरोपी है।

पुलिस में दी शिकायत में बरवाला मंडी के हनुमान निवासी ने बताया कि वह पिछले कई सालों से बरवाला मंडी में धान की खरीद बेच का काम करता है। वर्ष 2015 से मिल व्यापार का भुगतान नहीं करता है उसकी करनाल के ताराचंद मिल के मालिकों के साथ व्यापारिक जान पहचान है। वह सालों से उन्हें किसानों से जीरी खरीद कर देता है। मिल मालिक पेमेंट समय- समय पर देते रहते थे, हालांकि हर बार थोड़ी बहुत पेमेंट रह जाती।

दोनों की राशि 19 करोड़ रुपए से ज्यादा

शिकायत कर्ता ने बताया कि मिल को हिसाब किताब करने के लिए कहा तो 31 मार्च 2022 तक मिल व्यापार का भुगतान नहीं करता है 17 करोड़ 60 लाख 35 हजार 682 रुपए की पेमेंट उनकी ओर बकाया मिली। जिस पर फर्म संचालकों ने कहा कि जल्द ही यह रकम अदा कर दी जाएगी। उसके भतीजे की फर्म सज्जन कुमार ने भी मिलर्स से 1 करोड़ 91 लाख मिल व्यापार का भुगतान नहीं करता है 92 हजार 531 रुपए की जीरी बेची थी। जिसका भुगतान अभी बाकी है।

पंचायत में कर चुके थे मना

शिकायतकर्ता ने बताया कि मिलर्स के साथ कई बार पंचायत हो चुकी, लेकिन फिर भी पैसों का भुगतान नहीं किया और बार-बार टालते रहे। मिलर्स ने अब उसकी बकाया रकम देने से मना कर दिया और जान से मारने की धमकी दी। आरोपियों ने उनके साथ अमानत में ख्यानत की करते हुए धोखाधड़ी की है। पुलिस ने शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर मिलर्स संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

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