कैसे एक तरफा प्यार (Ek Tarfa Pyar) से बाहर निकलें

यह आर्टिकल लिखा गया सहयोगी लेखक द्वारा Trudi Griffin, LPC, MS. ट्रूडी ग्रिफिन विस्कॉन्सिन में एक लाइसेंस प्राप्त पेशेवर परामर्शदाता है। उन्होंने 2011 में मार्क्वेट यूनिवर्सिटी से क्लीनिकल मेंटल हेल्थ काउंसलिंग में एमएस किया।

यहाँ पर 41 रेफरेन्स दिए गए हैं जिन्हे आप आर्टिकल में नीचे देख सकते हैं।

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जब आप किसी से प्यार करते हैं और वह व्यक्ति आपसे प्यार नहीं करता है, तो आपको ऐसा लग सकता है जैसे कि आपकी दुनिया खत्म हो रही है । आप जिस दर्द का अनुभव कर रहे हैं वह वास्तविक है । विज्ञान से यह पता चला है कि अस्वीकृति से आपके दिमाग में वही दर्द संवेदन न्यूरॉन्स सक्रिय होते हैं जो कि शारीरिक दर्द से होते हैं । [१] X रिसर्च सोर्स आप अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, लेकिन आप रोमांटिक अस्वीकृति के दर्द को पीछे छोड़ सकते हैं और अपने जीवन को आगे बढ़ाना सीख सकते हैं।

बाहरी बार का क्या अर्थ है?

पौराणिक कथा के अनुसार, पानीपत महाभारत के समय पांडव बंधुओं द्वारा स्थापित पांच शहरों (प्रस्थ) में से एक था इसका ऐतिहासिक नाम पांडुप्रसथ है। पानीपत भारतीय इतिहास में तीन प्रमुख लड़ाइयों का गवाह है। पानीपत की पहली लड़ाई 21 अप्रैल 1526 को दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी और बाबर के बीच लड़ा गया था। बाबर की सेना ने इब्राहिम के एक लाख से ज्यादा सैनिकों को हराया। इस प्रकार पानीपत की पहली लड़ाई ने भारत में बहलुल लोदी द्वारा स्थापित ‘लोदी वंश’ को समाप्त कर दिया।

पानीपत की दूसरी लड़ाई 5 नवंबर 1556 को अकबर और सम्राट हेम चंद्र विक्रमादित्य के बीच लड़ी गई, सम्राट हेम चन्द्र उत्तर भारत के राजा थे तथा हरियाणा के रेवाड़ी से सम्बन्ध रखते थे। हेम चन्द्र ने अकबर की सेना को हरा कर आगरा और दिल्ली के बड़े राज्यों पर कब्जा कर लिया था। इस राजा को विक्रमादित्य के रूप में भी जाना जाता है। यह राजा पंजाब से बंगाल तक 1553-1556 से अफगान विद्रोहियों के खिलाफ 22 युद्धों जीत चुका था और 7 अक्टूबर 1556 को दिल्ली में पुराना किला में अपना राज्याभिषेक था और उसने पानीपत की दूसरी लड़ाई से पहले उत्तर भारत में ‘हिंदू राज’ की स्थापना की थी। हेम चंद्र की एक बड़ी सेना थी, और शुरूआत में उनकी सेना जीत रही थी, लेकिन अचानक हेमू की आंख में एक तीर मारा गया और उसने अपनी इंद्रियों को खो दिया। एक हाथी की पीठ पर अपने राजा को न देखकर उसकी सेना भाग गई। बाद में मुगलों द्वारा उस पर कब्जा कर लिया और उसका सिर काट दिया। उसके सिर को दिल्ली दरवाजा के लिए काबुल भेजा गया था और उसके धड़ को दिल्ली में पुराना किला के बाहर लटका दिया गया था। पानीपत की इस दूसरी लड़ाई ने उत्तर भारत में हेमू द्वारा स्थापित ‘हिंदू राज’ को कुछ समय के लिए समाप्त कर दिया।

पानीपत की तीसरी लड़ाई 1761 में अफगान आक्रमणकारी अहमद शाह अब्दाली और पुणे के सदाशिवराव भाऊ पेशवा के तहत मराठों के बीच लड़ा गया था। यह लडाई अहमद शाह अब्दाली ने सदाशिवराव भाऊ को हराकर जीत ली थी। यह हार इतिहास मे मराठों की सबसे बुरी हार थी। इस युद्ध ने एक नई शक्ति को जन्म दिया जिसके बाद से भारत में अग्रेजों की विजय के रास्ते खोल दिये थे। प्रसिद्ध उर्दू शायार मौलाना हली का जन्म भी पानीपत में ही हुआ था।

कर्ज के जाल से बाहर निकलने में आपकी मदद करेंगी ये जरूरी बातें

इस समस्या के समाधान के लिए सबसे पहले विक्रांत को सभी कर्ज की एक लिस्ट बनाने की जरूरत है

कर्ज के जाल से बाहर निकलने में आपकी मदद करेंगी ये जरूरी बातें

कर्ज चुकाने के लिए उन्होंने अपने कई दोस्तों और रिश्तेदारों से कर्ज लिया है. अब उनकी समझ में यह नहीं आ रहा है कि अपनी देनदारी को कैसे कम करें और किस तरह कर्ज के इस दुष्चक्र से बहर निकलें.

विक्रांत यह जानते हैं कि वे मुश्किल स्थिति में फंस गए हैं. लेकिन इससे बचने के लिए वे क्या करें, यह उनकी समझ में नहीं आ रहा है. कर्ज में फंसे होने की वजह से अब विक्रांत के क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ेगा. उनके वित्तीय लक्ष्य/बचत पर भी इसका निगेटिव असर दिखेगा.

इस समस्या के समाधान के लिए सबसे पहले विक्रांत को सभी कर्ज की एक लिस्ट बनाने की जरूरत है. इस लिस्ट में चुकाए जाने वाले ब्याज और न्यूनतम रकम एवं मासिक क़िस्त की तारीख को भी नोट करने की जरूरत है.

एक बार इस सूचना के तैयार हो जाने के बाद विक्रांत सही तरीके से प्लानिंग कर सकते हैं. अब उन्हें एक बजट बनाने की जरूरत है जिसमें कम से कम रकम का हिसाब लगाना होगा जो उन्हें कर्ज चुकाने के लिए हर महीने चाहिए.

इसमें उन्हें ध्यान रखना होगा कि इससे उनके क्रेडिट स्कोर पर कम से कम असर पड़े.इसमें उन्हें पेमेंट में प्राथमिकता का ध्यान रखना जरूरी है. इसके साथ ही किसी पेमेंट के डिफॉल्ट/देरी पर लगने वाले जुर्माने का भी ध्यान रखना उनके लिए उतना ही जरूरी है.

इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलेगी कि किस क्रेडिट कार्ड के बैलेंस ट्रांसफर से उन्हें अंत में कम ब्याज चुकाने में मदद मिलेगी. इसके अलावा मासिक क़िस्त के लिए रकम की व्यवस्था करने में भी उन्हें मदद मिलेगी.

इसके बाद विक्रांत को खर्च पर कंट्रोल करने की जरूरत है. उन्हें पिछला बकाया चुकाने तक नए कर्ज से बचने की जरूरत बाहरी बार का क्या अर्थ है? भी है. किसी पेमेंट के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं करना भी जरूरी है.

जब तक उनके सभी कर्ज न चुक जायें तब तक पेमेंट के लिए नकदी का इस्तेमाल करना ही सही विकल्प है. इससे उन्हें खर्च पर नजर रखने में मदद मिलेगी.

विक्रांत के लोन रीपेमेंट प्लान में आखिरी तारीख जरूर होनी चाहिए. कर्ज बाहरी बार का क्या अर्थ है? चुकाने की वजह से उनके पास नकदी की दिक्कत रहेगी. इससे उन्हें यह भी सबक मिलेगा कि हमें अपनी क्षमता के हिसाब से ही खर्च करना चाहिए.

(सेंटर फॉर इन्वेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग के सौजन्य से)

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बाहरी बार का क्या अर्थ है?

गाज़ीपुर जिले से नदियां प्रवाह

बारहमासी नदियों के एक आकर्षक नेटवर्क ने राज्य की संस्कृति को आकार दिया है और हजारों सालों से अपनी आबादी को प्यार करने वाली मां की तरह विकसित किया है, यही कारण है कि लोग इन नदियों के किनारे पर अपने त्योहारों को मनाते हैं और मनाते हैं। मुख्य नदियां गंगा, गोमती, गंगा, बेसन, मागाई, भाईसाई, टोंस और कर्मनसा हैं। गंगा बाहरी बार का क्या अर्थ है? नदी की यात्रा 90 कि.मी., गोमती 30 के.एम., गंगा 50 के.एम., बेसन 95 के.एम., मैगई 25 के.एम., भाईई 30 के.एम. और टन नदी यात्रा 20 के.एम. जिले में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व में गंगा और गोमती प्रवाह होता है। गंगा नदी के माध्यम से सामान ले जाने के लिए इलाहाबाद से कलकत्ता तक रास्ते पर परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ब्रिटिश काल में अफीम का परिवहन गाज़ीपुर से चीन तक बंगाल की खाड़ी के लिए किया गया था। उस समय स्टीमर और नौकाएं वाराणसी से कलकत्ता और लोगों के परिवहन के लिए चल रही थीं। 1887 में प्रसिद्ध कवि रवींद्रनाथ टैगोर कलकत्ता से गंगा के माध्यम से आए थे।

यह नदी पहली बार सैदपुर के चरम दक्षिण-पश्चिम में इस जिले को छूती है और लंबी दूरी के लिए गाजीपुर और वाराणसी के बीच की सीमा का निर्माण करती है। यहां पर यह बिस्तर बिगड़ती उत्तर-पूर्व में मुहम्मददाबाद को बिहार राज्य से बदलता है।

इस जिले में गंगा में शामिल होने वाला पहला अभ्यर्थी गोमती है जो सैयदपुर की दक्षिणी सीमा पर बहती है, वाराणसी से अलग है।

यह धारा जौनपुर के नजदीक बढ़ता है और जौनपुर और आज़मगढ़ की सीमाओं के साथ मिट्टी की भूमि के माध्यम से दक्षिण-पूर्वी दिशा में अपना मार्ग बनाकर बना देता है। यह करंदा और गाजीपुर परगना के बीच की सीमा बना देती है और मेनपुर के निकट गंगा में मिलती है।

बेन्सन का उद्गम देवगाँन तहसील (आज़मगढ़) में हुआ है और पूर्व की ओर बहती है और गंगा में बाएं किनारे पर मिलती है।

यह नदी परगना शियादाबाद के उत्तर में गाजीपुर जिले में प्रवेश करती है और गाजीपुर में टोंस में मिलती है।

यह नदी मुहम्मदाबाद गोहना (माउ) में उगता है और यह ज़हुरबाद से गुजरती है और बहादुरगंज के पास सरजू में पड़ती है।

ज़हुरबाद में प्रवेश कर और फतेह सराय के गांव के पास सरजू में पड़ता है।

कर्मनासा

कर्मनासा नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है धार्मिक प्रार्थना का नाश करने वाला नाम। उत्तर-पूर्व की तरफ से जिले की सीमा होती है, जो बिहार से अलग होती है। यह चौसा में बाड़ा के निकट गंगा में शामिल होता है जहां हुमायूं शेर शाह सूरी द्वारा हार गया था।

Dog Crying At Night Reasons: रात के समय घर के बाहर रो रहा है कुत्ता, इन कारणों की वजह से घट सकती है दुर्घटना

Reasons Behind Dog Crying

हिंदू धर्म में कई चीजों का उल्लेख किया गया है. जिनमें कुछ चीजों को शुभ तो कुछ को अशुभ माना गया है. इन्हीं अशुभ बातों में से एक रात के समय कुत्ते का रोना (dog crying at night) भी है. अकसर आपने देखा होगा कि रात के समय घर के बाहर कुत्तों के भौंकने और रोने की आवाजें (dog crying is inauspicious) सुनाई देती हैं. कई बार तो उन्हें हटा दिया जाता है. ताकि उनकी रोने की आवाजें सुनाई न दे सकें. क्योंकि घर के बड़े-बुजुर्गों का कहना होता है कि ये अपशकुन का संकेत है. ये रोने की आवाजें अशुभ और बुरे संकेतों की ओर इशारा करती हैं. प्राचीनकाल की मान्यताओं में कुत्ते का रोने को अशुभ होता है. अब सवाल ये आता है कि आखिर रात के वक्त ही अकसर कुत्ते क्यों रोते हैं? इसके पीछे की असली वजह क्या है? तो, चलिए जान लें ये अशुभ क्यों (why dog is crying) माना जाता है.

किसी अशुभ घटना का संकेत
रात में कुत्ते के भौंकने की पीछे एक वजह ये होती है कि वे रात में किसी अनहोनी घटना का संकेत देते हैं. कुत्ते भले ही रात में रोएं या फिर दिन में दोनों ही समय इनका रोना शुभ नहीं होता.

पालतू कुत्ते का रोना भी अशुभ
इसके अलावा ऐसा भी माना जाता है कि अगर घर का पालतू कुत्ता रोने लग जाता है या उसकी आंखों से आंसू आ रहे होते हैं, या फिर वो खाना-पीना छोड़ दे, तो भी इसका मतलब घर पर कोई संकट आने वाला है. और वे आपको इस तरह से संकेत देता है.

दिखते हैं पूर्वज
ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार रात में कुत्ते इस वजह से रोते हैं क्योंकि उन्हें आस-पास पूर्वज या आत्माएं दिखाई देती हैं. जिन्हें देखकर वे रोने लग जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि कुत्ते की देखने और सोचने की शक्ति बहुत तेज होती है इसलिए वे इन चीजों को जल्दी से भांप जाते हैं.

प्राचीनकाल में ये माना जाता था कि कुत्ते तभी रोते हैं जब उन्हें अपने बाकी के साथियों को संदेश पहुंचाना होता है. इस खास आवाज के जरिए बाहरी बार का क्या अर्थ है? वे कई बार अपने बाकी के साथियों को अपना लोकेशन बताते हैं ताकि वे उन तक आसानी से पहुंच सकें. वैज्ञानिक कारणों की बात करें तो वैज्ञानिकों का ऐसा भी मानना है कि कुत्तों को जब दर्द होता है तब भी वे रोते हैं या हाउल करते हैं. ये अपनी परेशानी को जाहिर करने का एक खास तरीका होता है. कुत्ता एक ऐसा प्राणी है जिन्हें इंसानों के साथ घुलमिल कर रहना पसंद होता है. अकेलापन उन्हें बिल्कुल भी नहीं भाता है. घर में या बाहर सड़क पर जब भी वे अकेले रहते हैं तो उन्हें अकेलापन (Why do dogs cry during the night) महसूस होता है. इस वजह से वे हाउल करते हैं.

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